क्या तुम मन को भटकने से रोक सकते हो
और
उसको सहज और स्थिर बना सकते हो.
क्या तुम अपने शरीर को बना सकते हो,
नवजात शिशु की तरह लचीला.
क्या तुम अपनी अंतर्दृष्टि को
इतना साफ़ बना सकते हो कि
तुम दिव्य प्रकाश को देख सको.
क्या तुम अपनी मर्जी थोपे बिना
लोगों से प्यार कर सकते हो,
उनका मार्गदर्शन कर सकते हो.
क्या तुम घटनाओं को बिना प्रभावित किये
दुष्कर कार्य सिद्ध कर सकते हो
क्या तुम अपने मन की मदद लिए बिना
सब कुछ समझ सकते हो,
सरलता से, उन्ही भावनाओं के साथ.
बिना कोई हक़ जताये _
जनम देना और पालन पोषण करना.
बिना फल की इच्छा किये _
कर्म करना.
बिना नियंत्रित किये _
दिशा प्रदान करना
यही निष्काम सेवा है
और
मुक्ति का मार्ग भी ..
Thursday, 7 May 2020
सेवा _ 10
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दिव्यात्मा_ 16
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