Monday, 13 July 2020

दिव्यात्मा_ 16

अपने मन को विचारों से आज़ाद कर दो.
तुम्हारा दिल बस शांत हो जाये.
जब तुम्हारा शरीर तुम्हें कैद करने को कोशिश करे,
तो ध्यान लगा कर गहरायी में चले जाओ
और
पा लो अपने दिव्य शरीर को,
जो तुम्हें आज़ाद रखेगा.
हर कोई कितना भी अलग क्यों न हो,
एक परम सत्ता का हिस्सा है
और उसे वहीं लौटना है
फिर सब कुछ एक हो जाना है.
यदि इस दिव्य केंद्र को नहीं पहचानोगे,
तो भ्रम और दुखों में भटकते रहोगे.
यदि जान लोगे कहाँ से आये हो,
तो जज्ब कर लोगे सब कुछ भीतर कहीं,
हलके से लोगे सब कुछ
और
बन जाओगे एक ज़िंदा दिल इंसान,
एक नरम दिल बादशाह को तरह,
ज़िन्दगी के रहस्यों को जान पाओगे.
सही अर्थों में ज़िन्दगी के तोहफों को दिल से क़ुबूल करोगे
और
मृत्यु को आलिंगन में लेने के लिए तैयार रहोगे.

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