क्या तुम मन को भटकने से रोक सकते हो
और
उसको सहज और स्थिर बना सकते हो.
क्या तुम अपने शरीर को बना सकते हो,
नवजात शिशु की तरह लचीला.
क्या तुम अपनी अंतर्दृष्टि को
इतना साफ़ बना सकते हो कि
तुम दिव्य प्रकाश को देख सको.
क्या तुम अपनी मर्जी थोपे बिना
लोगों से प्यार कर सकते हो,
उनका मार्गदर्शन कर सकते हो.
क्या तुम घटनाओं को बिना प्रभावित किये
दुष्कर कार्य सिद्ध कर सकते हो
क्या तुम अपने मन की मदद लिए बिना
सब कुछ समझ सकते हो,
सरलता से, उन्ही भावनाओं के साथ.
बिना कोई हक़ जताये _
जनम देना और पालन पोषण करना.
बिना फल की इच्छा किये _
कर्म करना.
बिना नियंत्रित किये _
दिशा प्रदान करना
यही निष्काम सेवा है
और
मुक्ति का मार्ग भी ..
Thursday, 7 May 2020
सेवा _ 10
Wednesday, 6 May 2020
शांति _ 9
जीवन इस तरह न जियो कि _
रोज़ मरना पड़े.
इतना पानी न भरो कि _
बाहर निकलने लगे.
इतने ज्यादा नोकीले न बनो कि _
नोक ही टूट जाये.
धन और सुरक्षा के पीछे इतना मत भागो कि _
दिल का चैन ही ख़त्म कर बैठो.
लोगों का इतना ख्याल मत रखो कि _
उनके गुलाम बन जाओ.
अपना काम करते रहो लेकिन,
श्रेय मत लो.
यही शांति का मार्ग है
और
उस आनंद का भी
जिसके लिए तुम्हे ये जीवन मिला है ..
पानी _ 8
मैंने भगवान देखा नहीं,
पर लगता है _
वो है पानी जैसा.
सबकी प्यास बुझाता.
बिना किसी भेद भाव के,
वहां तक भी पहुँच जाता,
जहाँ कोई भी न जाना चाहता.
बीच दरारों में निकल जाता,
अपना रस्ता बनाता
और
दिखता हमें कुदरत बन कर.
इसे भगवान न कहूँ तो क्या कहूँ मैं
क्योंकि इसकी अपनी कोई इच्छा नहीं.
सबकी ख्वाहिशें पूरी करता,
सबसे अलग है दिखता,
लेकिन रहता सबके भीतर.
उसे खाली करना है खुद को,
क्योंकि वो है भरा भरा सा.
वो बनाता है सब को
और
बन जाता है वजूद बन कर
सबके भीतर
मैं यदि खुद की सत्ता पा लूँ
तो शायद मुझे मिल जाये
परम सत्ता
या
भगवान.
उसके लिए मुझे
सिर्फ कर्म करना होगा,
पानी की तरह.
ताकि मिल जाऊँ,
अन्ततः अथाह सागर में ..
खोज _ 7
ज़िन्दगी है
असीमित,अनंत.
इसका अंत इसलिए संभव नहीं,
क्योंकि ये कभी आरम्भ ही नहीं हुई.
कुछ न भी अच्छा लगे तो भी संतुष्ट.
इसीलिए इसका नाम ज़िन्दगी है,
जीवन से भरपूर.
रहो तो जमीन पर,
ताकि गिरने का भय न हो.
सोच को साधारण कर लो.
संघर्ष को सहजता से लो.
उदार बनो.
जीत हार से न घबराओ.
नेतृत्व करो तो _
नियंत्रित करने की चेष्टा न करो.
काम कोई भी हो उसमें डूब जाओ.
परिवार में मौजूद रहो हरदम.
जब तुम खुद पर
भरोसा करना सीख जाओगे
और
किसी भी दौड़ से अलग कर लोगे
अपने आप को
तो हर कोई देगा तुम्हें समर्थन
और
पा लोगे
वो सब कुछ
जिसकी खोज में हो ..
माँ _ 6
ज़िन्दगी कितनी महान है,
बिलकुल माँ जैसी.
खाली, पर भरी भरी सी.
कभी न ख़त्म होने का अहसास देती.
हर किसी को पैदा करती,
देखभाल करती अच्छे से
और हाँ _
ये तुम में हर वक्त है मौजूद.
जब चाहो इसे बुला लो.
इससे खेलो मत,
इसके साथ खेलो.
थक जाओ तो
बैठ जाओ इसकी गोद में
और आराम कर लो.
शायद फिर
कभी न थक पाओगे ..
Tuesday, 5 May 2020
गुब्बारा _ 5
ज़िन्दगी तरफदारी नहीं करती.
ये पैदा करती है _
अच्छे को भी और बुरे को भी.
तुम भी तरफदारी न करो.
न ही रखो कोई भेद भाव.
दोनों का स्वागत करो,
साधु का भी, असाधु का भी
दोनों ज़िंदगी ने दिए हैं तुमको.
कर लो स्वीकार दोनों को.
ज़िन्दगी को एक बड़े गुब्बारे की तरह लो.
खाली, लेकिन अनंत समभावनाएँ लिए हुए.
हर तरफ शुन्य
जितना ज़िन्दगी को इस्तेमाल करो,
उतना विस्तार करती जाती है.
ये देती है अपना सब कुछ,
खुद को भी.
ज़िन्दगी को समझने की कोशिश में न पड़ो.
जितना इसके बारे में बात करोगे,
उतना काम जान पाओगे.
इस बस इसे बीच से पकड़ कर रखो
और
आनंद की पराकाष्ठा को छू लो.
यही शायद ज़िंदगी भी चाहती है तुमसे
और
कही न कही तुम भी ज़िंदगी से ..
Monday, 4 May 2020
कुआँ _ 4
ज़िन्दगी है इक कुँए की तरह,
पानी भरते रहो जितना चाहो.
पर फिर भी लगता है,
हरदम भरा भरा सा.
कुआँ तो जैसे अमरत्व को प्राप्त है.
वहां पर है असीम संभावनाएं,
ये सब दिखता नहीं.
मौजूद है लेकिन,
अपने पूरे वजूद के साथ.
किसने बनाया जीवन को..
भगवान ने ?
पर लगता है ये भगवान से भी पुराना है.
किसी खालीपन में बना इक आशियाना है
भ्रम _ 3
कुछ लोगों को बड़ा समझ कर
मैं बाकी लोगों को कमजोर कर बैठा.
चीज़ों को कीमती बना कर,
मैं खुद इक चोर बन बैठा.
मन को खाली कर इसे साधना है मुझको.
भर देना है फिर मर्म से इसे.
आकांक्षाओं को कमजोर करके,
समाधान को कठिन करना है मुझे.
सब कुछ खो देना चाहता हूँ,
जो पास है मेरे हर वो चीज़.
जो मुझे करती है भ्रमित.
जो कुछ आता है मुझे,
उसे भूल जाना चाहता हूँ.
मैं जानता हूँ सब कुछ ठीक होगा _
सिर्फ इससे ..
ज़िन्दगी _ 2
जब देखी कुछ चीज़ें सुन्दर मैंने
तो बाकी सब लगने लगी बेकार.
जब होने लगी चीज़ें अच्छी
तो न रहा किसी से सरोकार.
लगता है
होना और न होना _
एक दूसरे को बनाता है.
कठिनाई और आसानी करती हैं एक दूसरे की मदद.
लम्बा और छोटा करते हैं एक दूसरे को परिभाषित
ठीक वैसे ही _
जैसे ऊंचाई और निचाई हैं एक दूसरे पर निर्भर.
जो पहले हुआ और जो बाद में हुआ,
दोनों करते हैं पीछा एक दूसरे का.
तुम करो कुछ इस तरह की लगे,
जैसे कुछ हुआ ही नहीं
और सिखला दो बिना कहे.
कुछ मिलता है उसे पा लो,
जो खो चुके हो उसे जाने दो.
ज़िन्दगी भी तो ऐसी है _
सब कुछ है, पर पास कुछ नहीं रखती.
चलती जाती है बिना किसी उम्मीद के.
सब कुछ देती है और फिर भूल जाती है.
इसीलिए ज़िन्दगी कभी ख़त्म नहीं होती ..
एक नया सवेरा _ 1
वो जीवन
जिसको बताया जा सके
वो जीवन नहीं.
जिसको नाम दिया जा सके
वो भी जीवन नहीं.
जिसका कोई नाम नहीं,
सचमुच जीवन वही..
नाम से शुरू हुए सब काम
इच्छाओं से मुक्त होकर तुमने पा लिया सब कुछ
इच्छाओं में रहकर तुम सिर्फ देखते रहे
सब कुछ होते हुए.
ये खोना पाना सब आया एक जगह से
और वो है गहन अँधेरा
अँधेरे के भीतर गहराता एक और अँधेरा
और यहीं है _
सब कुछ दिखलाता एक नया सवेरा ..
दिव्यात्मा_ 16
अपने मन को विचारों से आज़ाद कर दो. तुम्हारा दिल बस शांत हो जाये. जब तुम्हारा शरीर तुम्हें कैद करने को कोशिश करे, तो ध्यान लगा कर गहरायी म...
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जीवन_ देखो तो सब अदृश्य हो जायेगा. सुनो तो कुछ न सुनाई देगा. छू लोगे पर पकड़ न पाओगे. ऊपर से ये चमकता नहीं, नीचे अँधेरा भी नहीं. साधारण...
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हम पहिये पर अपना ध्यान लगाते हैं, लेकिन ये बीच की धुरी है, जो गाड़ी चलाती है. हम घड़े की मिट्टी को आकार देने में लगे रहते हैं जबकि उसका...