Monday, 4 May 2020

कुआँ _ 4

ज़िन्दगी है इक कुँए की तरह,
पानी भरते रहो जितना चाहो.
पर फिर भी लगता है,
हरदम भरा भरा सा.
कुआँ तो जैसे अमरत्व को प्राप्त है.
वहां पर है असीम संभावनाएं,
ये सब दिखता नहीं.
मौजूद है लेकिन,
अपने पूरे वजूद के साथ.
किसने बनाया जीवन को..
भगवान ने ?
पर लगता है ये भगवान से भी पुराना है.
किसी खालीपन में बना इक आशियाना है

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