कुछ लोगों को बड़ा समझ कर
मैं बाकी लोगों को कमजोर कर बैठा.
चीज़ों को कीमती बना कर,
मैं खुद इक चोर बन बैठा.
मन को खाली कर इसे साधना है मुझको.
भर देना है फिर मर्म से इसे.
आकांक्षाओं को कमजोर करके,
समाधान को कठिन करना है मुझे.
सब कुछ खो देना चाहता हूँ,
जो पास है मेरे हर वो चीज़.
जो मुझे करती है भ्रमित.
जो कुछ आता है मुझे,
उसे भूल जाना चाहता हूँ.
मैं जानता हूँ सब कुछ ठीक होगा _
सिर्फ इससे ..
Monday, 4 May 2020
भ्रम _ 3
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