Monday, 4 May 2020

ज़िन्दगी _ 2

जब देखी कुछ चीज़ें सुन्दर मैंने
तो बाकी सब लगने लगी बेकार.
जब होने लगी चीज़ें अच्छी
तो न रहा किसी से सरोकार.
लगता है
होना और न होना _
एक दूसरे को बनाता है.
कठिनाई और आसानी करती हैं एक दूसरे की मदद.
लम्बा और छोटा करते हैं एक दूसरे को परिभाषित
ठीक वैसे ही _
जैसे ऊंचाई और निचाई हैं एक दूसरे पर निर्भर.
जो पहले हुआ और जो बाद में हुआ,
दोनों करते हैं पीछा एक दूसरे का.
तुम करो कुछ इस तरह की लगे,
जैसे कुछ हुआ ही नहीं
और सिखला दो बिना कहे.
कुछ मिलता है उसे पा लो,
जो खो चुके हो उसे जाने दो.
ज़िन्दगी भी तो ऐसी है _
सब कुछ है, पर पास कुछ नहीं रखती.
चलती जाती है बिना किसी उम्मीद के.
सब कुछ देती है और फिर भूल जाती है.
इसीलिए ज़िन्दगी कभी ख़त्म नहीं होती ..

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