जीवन_
देखो तो सब अदृश्य हो जायेगा.
सुनो तो कुछ न सुनाई देगा.
छू लोगे पर पकड़ न पाओगे.
ऊपर से ये चमकता नहीं,
नीचे अँधेरा भी नहीं.
साधारण सा, बिना नाम का.
शुन्य की दुनिया से लोट कर,
सब तरह के आकार को पा लेना.
एक नहीं बनी हुई आकृति जैसा.
नाजुक सी,
कभी न जनम लेने वाली.
इसको पा लो
तो
फिर कुछ शुरू करने की जरुरत नहीं.
इसके पीछे हो लो,
फिर कोई अंत नहीं.
तुम इस कभी जान नहीं पाओगे,
पर इस जैसे तो बन सकते हो.
खुद को बस अच्छे से महसूस करो.
तुम आये किधर से,
इतना समझ लो
यही बोधत्व है
और
ज़िंदगी पाने की तरकीब भी ..
Thursday, 2 July 2020
बोधत्व_ 14
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