जान लो कि _
सफलता
विफलता से ज्यादा खतरनाक है.
उम्मीद
डर से ज्यादा खोखली है.
चाहे सीढ़ी पर चढ़ो या उतरो,
हिलते रहोगे.
अगर संतुलन चाहते हो तो _
दो पैरों पर खड़े रहो,
कभी नहीं गिरोगे.
उम्मीद और डर
दोनों ही
हमारे
हताश और थके मन से
पैदा होते हैं,
सिर्फ
हमें खुद से अलग करने के लिए.
अगर मन की न सुनोगे
तो ही जीवन का मधुर संगीत सुन पाओगे
खुद पर भरोसा रखो
और
जीवन से वैसे ही प्यार करो
जैसे वो तुमसे करता है
और
तुम्हे वो सब मिल जायेगा,
जो तुमने कभी माँगा नहीं
पर ..
चाहा जरूर था.
Thursday, 2 July 2020
जीवन _ 13
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