Thursday, 2 July 2020

दिल _ 12

रंगीनियाँ
कई बार आँखों को अँधा कर देती है.
शोर
कई बार कानों को बहरा कर देता है.
स्वादिष्टता
कई बार स्वाद को ख़राब कर देती है.
आकांक्षाएँ,
बहुत सी हों तो दिल को रुखा कर देती है.
दुनिया में सुनो तुम सब की,
लेकिन करो सिर्फ अंदर की आवाज़ सुन कर.
तुम चीज़ों को बेखौफ आने जाने दो.
भीतर बाहर होने दो, जो हो रहा है.
आसमान की तरह खुलने दो,
अपने हृदय को.
तभी समेट पाओगे सारी क़ायनात.
और भर लोगे
अपनी झोली,
असीमित, अनंत ..

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