हम पहिये पर
अपना ध्यान लगाते हैं,
लेकिन ये बीच की धुरी है,
जो गाड़ी चलाती है.
हम घड़े की मिट्टी को
आकार देने में लगे रहते हैं
जबकि
उसका खालीपन ही महत्त्व रखता है.
घड़ा जितना खाली, उतना अच्छा.
हम मकान को,
बाहर से सुन्दर बनाने में लगे रहते हैं
लेकिन ये अंदर की जगह है
जहाँ रहना होता है हमें.
हम अपने अस्तित्व की चिंता करते हैं
जबकि
हम एक परम सत्ता का
हिस्सा भर हैं .
खुद से कुछ भी नहीं
और
जा मिलना है,
अपने वजूद के साथ
उसमें वापिस
जैसे नदी मिल जाती है
अथाह सागर में ..
Thursday, 2 July 2020
अस्तित्व _ 11
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